गुलाम अली के गजल1. हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर की तरह2. चमकते चांद को टूटा हुआ तारा बना डाला3. चुपके चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है4. ये दिल ये पागल दिल मेरा क्यों बुझ गया